मित्र की परख कैसे करें?(moral stories in hindi, moral stories for kids)

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ज़िन्दगी में हम बहुत लोगो से मिलते हैं लेकिन उनमे से कुछ ही हमारे दोस्त बनते  हैं और बहुत कम ही हमारे best friend बनते हैं लेकिन हम अपनी ज़िंदगी मे अपने दोस्तों को क्या सही से चुन पाते हैं क्या हम जिन दोस्तो को बेस्ट फ्रेंड बनाते हैं क्या वो सच मे आपके बेस्ट फ्रेंड बनने लायक होते हैं? तो सवाल ये हैं कि हमे कैसे फ्रेंड बनाने चाहिए? तो आईये इस बात को एक कहानी की मदद से समझते हैं-

बहुत समय पहले की बात है। एक गांव में सूरज नाम का एक लड़का रहता था,उसके बहुत सारे दोस्त थे। वो भी बहुत अच्छे अच्छे दोस्त थे। वो उनके साथ अपना पूरा पूरा दिन बिता देता था। सभी दोस्त खूब मस्ती करते थे, साथ साथ घूमने जाते और साथ साथ पढ़ाई भी करते थे। लेकिन ये सब बातें उसके पिता संजय को नही पसंद थी क्योंकि उसे लगता था कि उसके बेटे कर दोस्त अच्छे नही हैं तो उसने ये बात सूरज से कही लेकिन सूरज ने उस बात को नही मन और कहा कि आप गलत हैं मेरे दोस्त बहुत अच्छे हैं हम पूरा दिन साथ बिताते हैं आपको क्यों बुरे लगते हैं मुझे नही पता। संजय का सिर्फ एक दोस्त था जो उसका बहुत अच्छा दोस्त  था, लेकिन वो रोज़ नही मिलते थे।




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 संजय ने सूरज से कहा कि मैं तुम्हारे दोस्त की परीक्षा लेने चाहता हूं, मैं जानना चाहता हूं कि क्या वो सच मे अच्छे दोस्त हैं या सिर्फ ऐसे ही हैं। सूरज तैयार हो गया उसने कहा ठीक है मैं तैयार हूँ आपका जैसा मन परीक्षा लीजिये मेरे दोस्त ज़रूर पास हो जायेंगे। संजय ने कहा ठीक है तो आज रात 1 बजे हम तुम्हारे सबसे अच्छे दोस्त के घर चलेंगे। सूरज मान गया। रात को सूरज अपने पिता के साथ अपने दोस्त के घर गया और अपने दोस्त को पुकारा।


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 काफी पुकारने के बाद भी उसका दोस्त नही आया। फिर थोड़ी देर बात उन्होंने आवाज़ सुनी की उसका दोस्त अपनी माँ से कह रहा है कि माँ उनसे कह दे कि मैं घर पर नही हूँ। सूरज को बहुत बुरा लगा उसका सिर शर्म से झुक गया। फिर उसके पिता उसको अपने दोस्त के घर ले गए वहां उन्होंने अपने दोस्त को बुलाया। अंदर से आवाज़ आयी आ रहा हूँ मित्र रुके रहना थोड़ी देर बाद संजय का दोस्त एक हाथ मे पैसा और दूसरे में लाठी लिए खड़ा था। संजय ने पूछा कि ये किसलिए मैंने तो सिर्फ तुम्हे बुलाया है। दोस्त ने कहा हाँ लेकिन रात को मेरा दोस्त मेरे घर आया कोई ज़रूरी काम होगा या तो पैसे का या कोई झगड़ा हुआ होगा तो मैं दोनो ले आया। ये सुनकर सूरज को समझ आ गया कि दोस्त आखिर कैसे होने चाहिए।



ज्ञान- दोस्त वो नही जो दिन भर आपके साथ रहे आपके साथ घूमे असली दोस्त वो है जो आपके दुख में आपके साथ रहे। ज़िन्दगी में दोस्त काम बनाये लेकिन जांच परख कर बनाये जो सच मे दोस्त बनने लायक हों।


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To dosto zaroor batayein ki ye kahani kaisi lagi kya ye ek acchi moral story thi kya ye sach me moral stories in hindi, moral stories for kids and moral stories for adults ki category me rakhne layak hai.



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