HINDI KAHANIYA :- MORAL STORIES IN HINDI पेड़ का जन्मदिन मंत्री सुमेर की कहानियाँ(कहानी-2)

पेड़ का जन्मदिन


आप पढ़ने जा रहे हैं, HINDI KAHANIYA जो की MORAL STORY हैं।

इस कहानी को पढ़ने से पहले पढ़ें राज्य का महामूर्ख कौन?

                           मूर्खो की लिस्ट में सबसे ऊपर अपना नाम देखकर राजा अंदर ही अंदर सुमेर से गुस्सा रहने लगे। और उससे चिढ़ने लगे। उसकी हर बात को गलत कहने लगे और उस पर बात बात पर गुस्सा होने लगे। ऐसे ही एक दिन किसी बात पर राजा सूर्यभान सुमेर पर गुस्सा हो गए। और उसे ये शहर छोड़ जाने का आदेश दिया।
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                                    सुमेर ने राजा की आज्ञा का पालन किया और शहर छोड़ कर चला गया। कुछ समय के बाद राजा को अपनी गलती का एहसास हुआ।  आखिर उन्होंने मूर्खता तो दिखाई ही थी तभी तो उसने उसका नाम लिखा था। इसमें उसका क्या कसूर और राजा फिर से उसे पाना चाहते थे। राजा ने बहुत कोशिश की सुमेर को खोजने की। लेकिन वो नही मिला। अन्त में हार मान कर वो अपने किये पर पछताने लगे। लेकिन अब पछताने का क्या फायदा।अचानक उनको एक तरीका समझ मे आया।
   अगले दिन सुबह उन्होंने पूरे राज्य में एलान करा दिया। हमारे राजघराने के शाही वृक्ष का 100वां जन्मदिन है। इसलिए सभी गांव के प्रधान अपने गांव के सभी वृक्षो के साथ आएं। और जो नही आएगा उसको दंड दिया जाएगा। सभी प्रधान ये सुनकर बहुत चिंतित हो गए। सुमेर समझ गया कि राजा ने ये तरीका उसे खोजने के लिए ही अपनाया है। वो जिस गांव में था। उसके प्रधान से जाकर कहा कि आप चिंता न करें जब तक मैं हूँ ये गांव सुरक्षित है।
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                                         धीरे धीरे वो दिन भी आ गया जिसदिन राजा के पास जाना था। गांव के कुछ लोगो को लेकर मुखिया राजा के पास गया। और शहर के बाहर पहुंच कर एक व्यक्ति को राजा के पास भेजा। वो व्यक्ति राजा के पास आकर बोला की हमारे गांव के सभी पेड़ आ गए हैं। लेकिन वो इस शहर में नही आ रहे कह रहे हैं कि शहर के सभी वृक्ष जब उनका स्वागत करने यहां आएंगे तो ही वो यहां आएंगे। ये सुनकर राजा समझ गए की सुमेर यहीं पर रुका है। राजा ने उससे कहा कि सच सच बता की ये तरीका तुझे किसने बताया?
                                                   वह व्यक्ति डर गया। और बोला कि हमारे गांव में एक इंसान बाहर से आया है। उसी ने ये तरीका बताया है। वो भी शहर के बाहर है साथ आया है। राजा खुद शहर के बाहर गए। और सुमेर को सम्मान के साथ राजदरबार ले आये।
                                                     और उस गांव के सभी लोगो का खूब खिला पिला कर वापस भेज दिया। राजा सुमेर से फिर मिलकर रो पड़े। और कहा कि मैं तो पागल हूँ। तुम तो बुद्धिमान हो। क्या कोई अपने मित्र को ऐसे अकेला छोड़ कर जाता है ? अगर अब मैं गुस्सा भी हो जाऊं तो भी तुम कभी मुझे छोड़ कर मत जाना। अब मौत ही हमे अलग करे। उसके पहले तुम मुझसे अलग मत होना। तुम ये मुझसे वादा करो। इतना कहते कहते राजा का गला रुंध गया। और उन्होंने सुमेर को गले से लगा लिया।

शिक्षा- कभी गुस्से में कोई निर्णय नही लेना चाहिए वरना बाद में पछताना पड़ता है।

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