HINDI KAHANIYA :- MORAL STORIES IN HINDI प्यारा घोड़ा मंत्री सुमेर की कहानियाँ( कहानी-3)

प्यारा घोड़ा


ये HINDI KAHANIYA , MORAL STORIES IN HINDI हैं।



सुमेर के लौटने के बाद राजा बहुत खुश रहने लगे। अचानक कुछ पड़ोसी देशों ने रामगढ़ पर हमला कर दिया।
                 सेना लड़ाई करने लगी राजा खुद तलवार लेकर अपने घोड़े रोहतक पर सवार होकर युद्ध के लिए निकल पड़े। लड़ाई शुरू हुई दोनों पक्ष मजबूत थे। कोई भी हार मानने को तैयार न था। राजा सूर्यदेव लोगो को मारते मारते बहुत आगे निकल गए । तो आगे जाकर दूसरे देश के सैनिकों ने उन्हें घेर लिया। और उन्हें मारने वाले थे, लेकिन राजा सूर्यभान के घोड़े ने अपनी जान दांव पर लगाकर राजा की जान बच ली। और वहां से निकल भागा लेकिन वो खुद घायल हो गया। और किसी दूसरे युद्ध मे जाने लायक न रहा। सैनिको की बहादुरी से राजा सूर्यभान की सेना युद्ध जीत गयीं।

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                        राजा सूर्यभान बहुत खुश हुए। और अपने घोड़े रोहतक के लिए रहने की अच्छी व्यवस्था की। और एक नौकर को भी नियुक्त किया। राजा ने कहा की इसका पूरा ख्याल रखना। ये मुझे प्राणों से प्यार है। अगर इसको कुछ हुआ तो तुम्हारी खैर नही और अगर इसके मरने की सूचना किसी ने मुझे दी तो उसे फांसी की सजा मिलेगी।
                     समय  बीतता गया। और आखिरकार घोडे का अंतिम समय आ गया। और वो मर गया। अब नौकर बहुत परेशान हुआ। अब अगर वो इस बात को राजा को बताता तो उसकी जान चली जाती। जब उसे कुछ नही समझ आया तो वो मंत्री सुमेर के पास गया। और पूरी कहानी बताई और बचने का उपाय पूछा। सुमेर ने कहा कि तुम राजाजी से कुछ मत कहना बाकी मैं सब कुछ संभाल लूंगा।
                          सुमेर दरबार मे पहुँचा तो राजा से बोला राजा जी आपका प्रिय घोड़ा रोहतक पता नही क्यों किसी से बोल ही नही रहा है। ना ही कुछ खाना चाहता, न ही किसी से बात करना चाहता है। राजा ने कहा क्या वो मर गया है? सुमेर ने उत्तर देते हुए कहा पता नही राजाजी पर मुझे लगता है शायद वो आपसे नाराज़ है कि आप उससे कभी मिलने नही आते। इसलिए शायद किसी से बात नही कर रहा है। एक बार आप खुद चलकर उससे मिल लीजिये।
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                          राजा और सुमेर उस जगह गए जहां वो घोड़ा रहता था। राजा ने देखा की घोड़ा तो मर चुका है।राजा सुमेर पर गुस्सा हो गए। और बोले कि जब तुमको पता था कि घोड़ा मर चुका है तो इस बात को इतना घुमा फिरा कर कहने की क्या ज़रूरत थी?

                          सुमेर ने माफी मांगते हुए कहा माफ करिये महाराज पर ज़रूरत थी। क्योंकि आपने कहा था कि जो मेरे घोड़े की मौत की खबर देगा उसे फांसी पर चढ़ा दिया जाएगा। इसलिए अगर मैं आपको बताता की घोड़ा मर गया है तो आप मुझे फांसी पर चढ़ा देते। अगर नौकर सुनाता तो आप उसे फांसी पर चढ़ा देते।
                            राजा को अपनी गलती का एहसास हुआ। और उन्हें सुमेर की बुद्धिमानी पर बहुत अच्छा लगा। इसलिए राजा ने सुमेर को ढेर सारा धन देकर घर भेजा और घोडे का क्रियाकर्म किया।


शिक्षा-
 1)-कोई भी निर्णय लेने से पहले अच्छी तरह सोच लें।
2)- बुद्धिमानी के बल से सब कुछ जीता जा सकता है।

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