Hindi Kahaniya : Motivational stories in hindi पढ़ाई का जुनून(part-1)

आज आप पढ़ने जा रहे हैं ऐसी Hindi Kahaniya जो Motivational stories in hindi हैं और ये Kahaniya आपकी सोच बदल देंगी।


"क्या आप ही शेखर चक्रवर्ती हैं?" स्कूल के गार्ड ने मुझसे सवाल किया तो मैंने हाँ में सिर हिला दिया। यहां बैठिये अभी प्रिंसिपल सर नही आये हैं थोड़ा इंतज़ार कर लीजिए आते ही होंगे। वही सर जो कभी लेट नही होते थे। मैं उन्ही का इंतज़ार कर रहा था, जिन्होंने मुझे ये ज़िन्दगी दी थी।

आज जब 15 साल बाद उसी जगह खड़ा हूँ जहां से शुरुआत की थी तो कई सारी यादें किताब के पन्नो की तरह तेज़ी से पलटती नज़र आती हैं जैसे किसी तेज़ हवा ने उसे छेड़ दिया हो।

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                       हाँ आज वहीं खड़ा हूँ जहां से मैंने पढ़ाई की थी। मुझे आज भी स्कूल का वो दिन याद है, जब मैं यहां इसलिए आता था क्योंकि मैं पढ़ना चाहता था लेकिन वो ये कह कर मुझे हमेशा भेज देते थे कि जा अपने पापा को लेकर आ तब तुझे यहां पढ़ने को मिलेगा, तब तेरा नाम  लिखा जाएगा। क्या कहता उनसे की मेरे पापा खुद नही चाहते कि मैं पढ़ाई करूँ।
                         ऐसा नही था कि मैंने पापा से नही कहा था कि मुझे भी पढ़ाई करनी है, पर वो कहते थे इतने पैसे नही की दो समय की रोटी खा सके तो पढ़ाई का खर्चा कहाँ से दूंगा। मैं उनकी बात भी समझता था लेकिन ये छोटा सा दिल नही मानता था, वो तो और बच्चो की तरह अच्छे कपड़े पहन कर स्कूल जाना चाहता था। मुझे याद है मैं भी उन बच्चो के साथ ही निकलता था घर से। बस फर्क इतना था कि वो पढ़ने जाते थे और मैं चाय की दुकान पर प्लेट, गिलास साफ करने।
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                         एक दिन मैंने सोचा क्या हुआ वो मेरा नाम नही लिखेंगे मुझे नही पढ़ाएंगे लेकिन अगर मैं चोरी से पीछे जाकर छिप कर बैठ जाऊं तो कौन जान पायेगा की मैं भी पढ़ता हूँ? मैं उस दिन दुकान पर नही गया। बल्कि सब बच्चो से जल्दी निकलकर जाकर पीछे की सीट के नीचे बैठ गया कुछ देर बाद टीचर आये और पढ़ाने लगे।
                          सच कहूं तो वो उस वक़्त टीचर नही बल्कि भगवान लग रहे थे। मैं पूरा दिन वहां छिप कर पढ़ा और शाम को घर चला गया। अब मैं रोज़ ऐसा करने लगा था। मुझे भी पढ़ाई समझ आने लगी थी। मैं भी बड़ा होकर कुछ बनना चाहता था। लेकिन चोरी की पढ़ाई कितनी दूर जाती? एक दिन मैं पकड़ा गया।
                            वही टीचर जिनको मैं भगवान मानता था, मुझे कुत्तों की तरह पीट रहे थे। जब उनका मन भर गया तो उन्होंने चपरासी को बुलाया और कहा की इसे एक रूम में बंद कर दो।
                              वो मुझे रूम में बंद करने के लिए ले जाने लगे। मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मैंने कुछ बहुत बड़ा खजाना चुरा लिया हो और वो मुझे सज़ा दे रहे हैं। जब वो मुझे रूम में बंद करने ले जा रहे थे तो चुपके से पूछा तुम वहाँ क्या कर रहे थे। मेरे पास पढ़ने के लिए पैसा नही है और मैं पढ़ना चाहता हूं इसलिए वहां छुप कर पढ़ रहा था।
                                कुछ देर रुककर उन्होंने पूछा अगर पैसा हो तो पढोगे? मैंने कहा हाँ। उन्होंने कहा किसी को बताना मत और तुम यहाँ से घर चले जाओ। बस मुझे बता दो की तुम कहाँ रहते हो? मैं रात को आकार तुमसे मिलूंगा और तुम्हारी पढ़ाई की बात करूंगा।


                                                                                          आगे पढ़ें>>

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