HINDI KAHANIYAAN : MORAL STORIES IN HINDI दरबार में बगीचे की हवा (सुमेर की कहानियाँ) कहानी-10

दरबार में बगीचे की हवा


आज सुनाने जा रहा हूँ Moral Stories In Hindi की  Hindi Kahaniya
   
                      एक बार की बात है। राजा सूर्यभान का दरबार लगा हुआ था। राजा प्रजा की परेशानियों को सुन रहे थे। उस वक़्त गर्मी का मौसम था और दोपहर हो गयी थी। जिससे गर्मी और बढ़ गयी थी। लोग गर्मी से बेहाल हो गए थे। लोग सोच रहे थे की इस गर्मी से छुटकारा कैसे पाया जाये? राजा खुद परेशान थे।
                     लोग राजा से सवाल कर रहे थे कि महाराज इस गर्मी का क्या किया जाये? कैसे इस गर्मी से बचा जाये? और इस दरबार को ठंडा किया जाये।

http://no1hindikahaniya.online
                      ये सभी बातें चल ही रही थी की एक लोग ने कहा कि महाराज गर्मी के मौसम में सुबह सुबह बगीचे में घूमना बहुत अच्छा होता है और तो और सुबह की हवा ठंडी और सुगन्धित होती है बगीचे में।  उसने बताया की महाराज अगर दरबार को बगीचे में लगाया जाए तो मौसम ठंडा रहेगा। दोपहर में भी बगीचे में हवा ठंडी रहती है। राजा को ये बात भा गयी। उन्होंने कहा कि कल से दरबार बगीचे में लगेगा।
                         उस दरबार में बहुत से ऐसे लोग थे जो सुमेर से जलन करते थे। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि बगीचे की हवा के लिए दरबार को बगीचे में क्यों ले जाना? बगीचे की हवा को ही दरबार में ले आते हैं। लोगो ने कहा कि विचार तो अच्छा है लेकिन ऐसा कौन कर सकता है। तो उसने चुटकी लेते हुए कहा की असंभव को संभव करने वाला सुमेर और कौन।
                        राजा को पता था की ये सुमेर से जलन करता है और जानता है की बगीचे की हवा को महल में नहीं लाया जा सकता इसलिए ऐसा बोल रहा है। ताकि वो सुमेर को नीचा दिखा सके।
http://no1hindikahaniya.online
                         राजा ने सुमेर की तरफ नज़र घुमाई। पाया कि वो थोड़े भी चिंतित नहीं हैं। जिससे राजा समझ गए कि सुमेर के पास कोई न कोई उपाय ज़रूर है।
                          उन्होंने मुस्कुराते हुए सुमेर से कहा," सुमेर पूरी बात तो तुम सुन ही चुके हो। कुछ कहने को बचा तो है नहीं। तो बताओ कि क्या तुम ऐसा कर सकते हो क्योंकि ये कार्य असंभव है?"
                            सुमेर ने मुस्कुराते हुए कहा,"महाराज आपने सुना नहीं शायद की असंभव को भी संभव कर दे वो है सुमेर। तो मेरे लिए ये कार्य असंभव तो नहीं है। हाँ कठिन जरूर है।"
                             राजा ने कहा," तो कब ला रहे हो बगीचे की हवा महल में?"

सुमेर ने कहा,"कल महाराज।"

                      ये सुनकर जो सुमेर से जलन करते थे। वो अपना सा मुह लेकर रह गए क्योंकि अब उनके पास कहने को कुछ नहीं था। फिर भी सभी बहुत उत्सुक थे की सुमेर कैसे बगीचे की हवा को महल में लाएगा।

                            अगले दिन दरबार लगा। सभी बेसब्री से सुमेर का इंतज़ार कर रहे थे, की कब वो बगीचे की हवा लेकर आएगा और उससे भी ज़रूरी की वो कैसे लेकर आएगा। कुछ देर बाद सुमेर आया तो सभी उसकी तरफ देखने लगे।
                        राजा ने पूछा," कहाँ हैं बगीचे की हवा?" सुमेर ने कहा,"महाराज बाहर है। आपकी आज्ञा हो तो उसे अन्दर लाये।" महाराज ने आज्ञा दे दी तो सुमेर ने कुछ लोगो को अन्दर बुलाया। उनके हाथ में पंखे थे जो पूरी तरह से इत्र से भीगे हुए थे और वो लोग अन्दर आते ही उन पंखो से हवा करने लगे।
                          जिससे पूरे दरबार में हवा चलने लगी और इत्र की वजह से वो बहुत सुगन्धित थी। वो बिल्कुल बगीचे की हवा जैसी लग रही थी। सब उस हवा का आनंद लेने लगे और कहने लगे कि सच में ये बगीचे की हवा है।
                            राजा बहुत प्रसन्न हुए और उन्होंने सुमेर को एक हज़ार स्वर्ण मुद्राएं पुरस्कार के रूप में दी। ये देखकर सुमेर से जलन करने वालो के दिल में आग सी लग गयी। लेकिन अब वो क्या कर सकते थे। राजा ने सुमेर को गले से लगा लिया और कहा," सच में तुम असंभव कार्य को भी संभव कर सकते हो। तुम सच में सभे कीमती हीरे हो।"


शिक्षा - बुद्धि के बल पर असंभव कार्य को भी संभव किया जा सकता है।

READ MORE-  ब्राहमण का खज़ाना (सुमेर की कहानियाँ) कहानी-9

टिप्पणियां

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

Rakshabandhan 2020 : रक्षाबंधन कब है ? Date , Muhurth and history of Rakshabandhan by no1hindikahaniya

Moral stories in hindi for kids : इन्द्रियों का झगडा by no1hindikahaniya

Hindi Kahaniya: Love stories in hindi (मेरा सच्चा प्यार)