HINDI KAHANIYAAN : MORAL STORIES IN HINDI राजा पर जूती (सुमेर की कहानियाँ) कहानी 18

राजा पर जूती


आज सुमेर की HINDI KAHANIYA में आप पढेंगे MORAL STORIES IN HINDI जो की FUNNY STORIES IN HINDI से भी जुडी हुई हैं।

                                              राजा सूर्यभान का दरबार लगा हुआ था। तर्क वितर्क चल रहा था। राजा ने कहा कि लोग किसी भी बात को आसानी से नहीं मानते। उन्हें मूर्ख बना कुछ भी करा पाना आसान नहीं होता। दरबार के बहुत से मंत्रियों ने राजाजी के बात में बात मिलायी और कहा," महाराज आप बिल्कुल सही कह रहे हैं।"

                                              राजा ने इस बात को जब सुमेर से कहा तो सुमेर ने इस बात से साफ़ इनकार कर दिया। सुमेर ने कहा," लोग किसी भी बात को बड़ी ही आसानी से मान  जायेंगे। अगर उन्हें बात बताने वाला बुद्धिमान हो।" सुमेर ने कहा," मै असंभव से असंभव कार्य भी किसी से करा सकता हूँ उसे मूर्ख बना कर। उसने आगे कहा," महाराज मै तो यहाँ तक कहता हूँ की मै राजा पर जूते तक मरवा सकता हूँ।"

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                                             ये बात राजा को सही नहीं लगी। राजा ने कहा," ये तुम मुझे करके दिखाओ।" सुमेर ने कहा," महाराज इसमें वक़्त लगेगा लेकिन ये हो ज़रूर जायेगा।" राजा ने कहा," सुमेर तुम चाहे जितना वक़्त ले लो लेकिन तुम मुझे ये करके दिखाओ।"

                                             इस बात को महीनो बीत गए। राजा खुद इस बात को भूल गए। एक दिन राजा के शादी के लिए पहाड़ी राज्य का आमंत्रण आया। राजा ने उसे स्वीकार कर लिया। अब राजा की शादी पहाड़ी राजा के लड़की से होने वाली थी। पहाड़ी राजा रीति रिवाज उतने अच्छे से नहीं जानते थे लेकिन वो शादी को पूरे रीति रिवाज के साथ करना चाहते थे। शादी की तैयारियां चल रही थीं।
                                             एक दिन सुमेर खुद पहाड़ी राजा के पास गया और कहा," महाराज आप रीति रिवाज नहीं जानते तो मै आपको वही बताने आया हूँ। क्योंकि राजाजी को रीति रिवाज बहुत पसंद हैं।"  पहाड़ी राजा ने कहा," हम भी चाहते हैं की शादी पूरे रीति रिवाज के साथ हो। पर क्या करें हमे रीति रिवाज का कोई ज्ञान नहीं है ?" सुमेर ने कहा," मै आपको सारे रीति रिवाज बताऊंगा।"
                                               सुमेर ने सारे रीति रिवाज बताये और अंतिम में कहा," राजा सूर्यभान के खानदान में एक रिवाज चलता आ रहा है की शादी के बाद लड़की अपने पति पर मखमल की जूती फेंकती है।"
                                                  ये बात पहाड़ी राजा को नहीं जमी। पहाड़ी राजा ने कहा," अपने पति पर जूती फेकना ये रिवाज तो सही नहीं क्योंकि अपने पति को मारना गलत है।" सुमेर ने कहा," महाराज ये रिवाज है। अगर आप नहीं करना चाहते तो मै कुछ नहीं कहूँगा लेकिन ये रिवाज बहुत दिन से चला आ रहा है।" पहाड़ी राजा ने कहा ठीक है ये रिवाज भी निभाया जायेगा।

                                                शादी का दिन आ गया। राजा की शादी पहाड़ी राजा के लड़की से हो गयी। जैसे ही राजा ने लड़की को माला पहनाई। लड़की ने भी माला पहनाई और हँसते हुए अपने पैर से मखमल की जूती निकल कर राजा पर फ़ेंक दी। ये देख राजा को बुरा लगा। सुमेर राजाजी के बगल में ही था। उसने कहा," महाराज इसमें लड़की को कोई गलती नहीं है सब मेरा किया हुआ है।" राजा ने लड़की को जूती वापस कर दी।

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                                                जब शादी के बाद राजा वापस महल में आये तो सुमेर ने पूरी बात कह सुनाई। राजा ने कहा," तुम ठीक कहते हो सुमेर। अगर इंसान बुद्धिमान हो तो किसी को भी मूर्ख बना सकता है।"

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