HINDI KAHANIYAAN : MORAL STORIES IN HINDI फूल की चोरी (सुमेर की कहानियाँ) कहानी-15

फूल की चोरी 


आज सुमेर की HINDI KAHANIYAAN में आप पढ़ेंगे KAHANI 'फूल की चोरी'।

                                 वैसे तो फूल सबको पसंद आता है। अगर बात गुलाब के फूल की बात हो तो वो तो सबको बहुत पसंद आता है। राजा सूर्यभान के बाग़ में बहुत अच्छे अच्छे फूल होते थे। उनमे से गुलाब का फूल सबसे अच्छा होता था और बहुत ही सुगन्धित भी होता था। ऐसा गुलाब का फूल पूरे राज्य में कहीं नहीं मिलता था।
                              एक बार राजा ने अपने सभी मंत्रियों को एक एक गुलाब का फूल दिया था। राजा ने सुमेर को भी वो फूल दिया था। सुमेर ने वो फूल अपनी पत्नी को ले जाकर दे दिया।
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                                 सुमेर की पत्नी को वो फूल बहुत पसंद आया। सुमेर की पत्नी को वो फूल इतना पसंद आया की वो अपने बेटे को राजा के बाग़ में भेजकर रोज गुलाब का एक फूल मंगवाने लगी। वो ये काम चोरी से करवाती थी। ये बात सुमेर को पता नहीं थी की उसकी पत्नी राजा के बाग़ से फूल मंगाती है, वो भी चोरी से।

                                 राजा के सैनिको को ये बात पता चली। सैनिको में इतनी हिम्मत नहीं थी की वो राजा के सामने सुमेर की शिकायत कर सके।
                                सैनिको ने जाकर मंत्री से बताया। मंत्री सुमेर से जलन रखता था। वो पहले से ही सुमेर की शिकायत का रास्ता खोज रहा था।
                                  मंत्री ने सोचा की अगर मै जाकर राजा से सुमेर की शिकायत करता हूँ तो ऐसा हो सकता है की सुमेर अपना दिमाग लगाकर बच जाए लेकिन अगर मै सुमेर के बेटे को रंगे हाथो फूल चोरी करते हुए राजा के सामने के आऊ तो फिर सुमेर कुछ नहीं कर पायेगा।
                               मंत्री ने एक तरीका सोचा। मंत्री ने पता किया की सुमेर का बेटा कब बाग़ में चोरी करने आता है। उसे जब पता चला की सुमेर का बेटा बाग़ के अन्दर जा चुका है, तो उसने बाग़ को चारो तरफ से घेर लिया ताकि वो कहीं भाग न पाए।
                                 मंत्री  राजा को भी बाग़ के दरवाजे पर ले आया और सुमेर को भी और कहा," महाराज सुमेर का बेटा रोज बाग़ में फूल की चोरी करने आता है वो बाग़ में फूल की चोरी करने अन्दर गया हुआ है। हमने बाग को चारो तरफ से घेर लिया है। वो अब भाग नहीं सकता। आज आप खुद देख लीजियेगा की वो चोरी करता है।
                                 इस बात पर एक मंत्री ने सुमेर को चिढाते हुए कहा," कहो सुमेर इस बारे में अब तुम्हारा क्या कहना है ?" सुमेर ने कहा," मै क्या कहूँ ? मेरे बेटे को बोलने आता है। वो खुद बोल देगा। मुझे तो लगता है की मेरा बेटा जड़ी बूटियाँ लेने यहाँ आया होगा क्योंकि मेरी पत्नी के सर में दर्द रहता है तो उसने दवा बनाने के लिए मंगाया होगा। वो वही लेने आया होगा।"
                                  सुमेर ने ये बात इतनी तेज़ी से कही थी की उसका बेटा इस बात को सुन ले। सुमेर के बेटे ने अपने पिता की आवाज सुनी और समझ गया। उसने तुरंत थैले में से फूल निकाले और उनकी जगह जड़ी बूटियाँ भर ली।

                                जब सुमेर का बेटा बाग़ के दरवाजे पर पहुंचा तो उसका झोला भरा था। उसे देखकर मंत्री ने कहा," महाराज इसके झोले में फूल है। जिसकी ये चोरी करता है। राजा ने उससे झोला खोलकर दिखाने को कहा।
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                                जब लड़के ने झोला खोला तो उसमे जड़ी बूटियाँ भरी थी। पूछने पर लड़के ने बताया की माँ ने मंगाया है उनकी तबियत ख़राब है। राजा ने ये बात सुनी तो मंत्री पर गुस्सा हो गए की वो बेवजह राजा का समय ख़राब कर रहा है और दुबारा ऐसा न करने के लिए कहा।

                                 सुमेर की बुद्धिमानी की वजह से वो फिर बच गया और सुमेर के दुश्मनों को फिर से बेज्ज़ती सहनी पड़ी

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