HINDI KAHANIYAAN : MORAL STORIES IN HINDI सुमेर का उपहार (सुमेर की कहानियाँ) कहानी-11

सुमेर का उपहार


आज सुमेर की HINDI KAHANIYAAN में आप पढ़ेंगे HINDI KAHANI जो की MORAL STORIES IN HINDI है।

                                  राजा सूर्यभान एक शांतिप्रिय राजा थे। वो बेवजह का झगडा या युद्ध पसंद नहीं करते थे, लेकिन अगर कोई उनपर हमला करता था तो वो चुप भी नहीं बैठते  थे। उन्हें युद्ध कौशल का भी अच्छा ज्ञान था। वो हर युद्ध जीतते थे, लेकिन कभी भी अपने राज्य को बढ़ाने के लिए उन्होंने अपने पडोसी राज्यों पर हमला नहीं किया। वो उनके साथ मित्रता का व्यवहार रखते थे।

                          लेकिन कुछ लोगो को मित्रता पसंद नहीं आती। उसी तरह उनके भी एक पडोसी राज्य को उनकी मित्रता पसंद नहीं आई। उन्होंने राजा सूर्यभान के राज्य पर हमला कर दिया। राजा सूर्यभान को ये बात पसंद नहीं आई। उनकी सेना भी इस युद्ध के लिए तैयार नहीं थी, इसलिए उनकी हार होने लगी। ऐसा देखकर राजा ने खुद युद्ध में जाने का निर्णय लिया। राजा सूर्यभान के युद्ध कौशल के आगे विपक्षी ज्यादा देर नहीं टिक पाए, और आखिरकर उन्होंने राजा सूर्यभान के सामने घुटने टेक दिए।

                          राजा सूर्यभान की चारो तरफ जय जयकार होने लगी और राजा अपने महल को लौटने लगे। उस युद्ध में सुमेर भी गए थे लेकिन लौटते समय वो थोडा पीछे रह गए और उनकी मुलाकात राजा से उस दिन नहीं हुई।

                          राजा की जीत की ख़ुशी में अगले दिन महल में जश्न का माहौल था। सभी लोग राजा को उपहार दे रहे थे। सभी पडोसी राजाओं ने भी राजा सूर्यभान के लिए बहुत अच्छे अच्छे उपहार भेजे और तो और सभी मंत्रियों ने भी राजाजी को उपहार देते हुए ढेर सारी शुभकामनाएं दी।

                           अंत में एक आदमी नीम का छोटा सा पौधा लेकर आया और कहा,"महाराज ये उपहार आपके लिए सुमेर ने भेजा है और आपको हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं।" नीम का पौधा उपहार में देखकर राजा जी को अच्छा नहीं लगा।

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                             वैसे तो सुमेर के दुश्मन दरबार में कम नहीं थे। वो वैसे ही सुमेर को दंड दिलाने का उपाय खोजा करते थे और इससे अच्छा अवसर और कहाँ मिलता? उन्होंने राजा से कहा की महाराज सुमेर आपको नीम की तरह कडवा कहना चाहता है। तभी ये उपहार भेजा है। राजा को भी ये बात बुरी लगी। राजा ने सैनिको को आदेश दिया कि जाओं और सुमेर को पकड़ कर लाओ।

                               अगले दिन सुमेर को राजा के सामने सैनिको ने पकड़ कर पेश किया। पूरा दरबार शांत था। तभी राजा ने गुस्से में कहा," सुमेर तुम अपने आप को समझते क्या हो? तुम्हे क्या लगता है की मै नीम की तरह कडवा हूँ? इसीलिए तुमने मुझे नीम उपहार में भेजा है।"
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                               सुमेर समझ गया की उससे नफरत करने वालो ने राजाजी को उसके खिलाफ भड़काया है। सुमेर ने तुरंत कहा, "नहीं महाराज मेरा ये मतलब नहीं था। मेरा नीम के पौधे से मतलब था की जैसे नीम का पेड़ बाकी सभी पेड़ों से ज्यादा दिन तक रहता है वैसे ही आपकी भी आयु सभी से अधिक हो। जैसे नीम की महक से मक्खी मच्छर भागते हैं वैसे ही आपके दुश्मन आपकी वीरता देखकर भाग जाएँ। जैसे नीम के पेड़ के नीचे बैठने से गर्मी में भी शीतलता मिलती है वैसे ही आपके राज्य में रहने वालो को भी सुख का अनुभव हो। आपका राज्य खुशहाल बने।

                              सुमेर की ये बात सुनकर राजा बहुत खुश हुए और सुमेर को उपहार स्वरुप बहुत सारा धन दिया। जिसे देखकर सुमेर के दुश्मनों का मुह लटक गया।

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