मुहावरा 'बारह बजना' : कहाँ से आया ये मुहावरा?

मुहावरा 'बारह बजना' का मतलब होता है- बुरी तरह से डर जाना।

जब कोई भी व्यक्ति, जानवर आदि बहुत अधिक डर जाते हैं, तो कहा जाता है।

इसके चेहरे पर बारह बजे हैं।


मुहावरा 'बारह बजना' के उदाहरण-

1)- पुलिस को देखकर चोर के चेहरे पर बारह बज गए।

2)- आज मेरा होमवर्क नही पूरा है इसलिए मेरे बारह बजे हुए हैं।

3)- शेर को देखकर रामू के चेहरे पर बारह बज गए।

4)- विजय आज चोरी करते हुए पकड़ा गया इसलिए उसके चेहरे पर बारह बजे हुए हैं।

5)- मुझे लड़ाई नही पसंद। लड़ाई का नाम सुनकर ही मेरे चेहरे पर बारह बज जाते हैं।


'बारह बजना' ये मुहावरा कहाँ से आया?


वैसे तो हिंदी में मुहावरे बहुत हैं, लेकिन मुहावरा बारह बजना का अलग ही महत्व है। हम सोचते हैं कि ये जो मुहावरे बने हैं, ये बहुत समय पहले लोगो ने सोच कर बना दिया होगा। लेकिन ऐसा नही है।

 हर एक मुहावरे के पीछे एक घटना है, एक कहानी है। उसी तरह से मुहावरा बारह बजना के पीछे भी एक कहानी है।

बात 1739 ई• की है। ये वो वक़्त था जब मुग़ल लोगो ने भारत देश पर हमला किया और जी भरकर देश को लूटा। उसी समय एक लूटेरा था नादिर शाह। उसने दिल्ली पर हमला किया और जो मन में आया लूटा। 

वो लूटेरा इतना निर्दयी था कि धन दौलत लूटने के साथ साथ उसने सैकड़ो हिन्दू औरतो को भी बंदी बना लिया। 

वह इन सब औरतो को बंदी बना कर महल ले जा रहा था। जब ये बात सिक्खों के फौज को पता चली, तो वो आगबबूला हो गए। उन्होंने ठाना की वो उन औरतो को आज़ाद कर कर ही दम लेंगे।

क्योंकि नादिर का इलाका दूर था। इसलिए जाने में कुछ दिन लगते थे। सिक्ख फौज इस बात का फायदा उठाती थी, और रात के बारह बजे के आस पास उसके डेरे पर हमला करके उन औरतो को आज़ाद करा देते थे। साथ ही साथ उसके साथियों की अच्छे से पिटाई भी करते थे

जैसा कि पहले आपने पढ़ा कि उस वक़्त मुगलो का शासन था और वो जब चाहते थे सुंदर स्त्रियों को नगर से उठवा लेते थे। बस फिर क्या था? इसके बाद सिख फौज ने कमर कसी। उन्होंने प्रण लिया कि अब वो किसी औरत को बंदी नही बनने देंगे।

अब जब भी लूटेरे औरतो को बंदी बनाते। सिख फौज रात को बारह बजे के आस पास हमला करके उन सबको छुड़ा लाती थी। वो इस लड़ाई में छापामारी युद्ध विधि का प्रयोग करते थे

सिख फौज के हमले से लूटेरे इतने डर गए थे, कि जब वो महल में होते थे तो भी रात को बारह बजे के आस पास जाग जाते थे। और चिल्लाने लगते थे सिख फौज आ गयी भागो। वो इतना डर गए थे कि महलो में भी सोना मुश्किल हो गया था। वहीं से ये मुहावरा बना बारह बजना।


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